Dharti Aur Beej

Dharti Aur Beej

राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र पहला संस्करण: १९९७

1997 313 p. ISBN : 81-7119-316-1 मूल्य: २५०.०० रुपये


अनुक्रम

 

जनपदीय-अध्ययन जनता के क्रियाशील जीवन का अध्ययन है।  यदि कोई अध्येता जनजीवन की मूल प्रेरणाओं को समझना चाहे, तो जनपदीय-अध्ययन के अतिरिक्त दूसरा कोई मार्ग नहीं है।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा प्रतिष्ठापित अनुसंधान-पद्धति के अंतर्गत ब्रज-क्षेत्र के किसानों में 'धरती-बीज' की अवधारणा का अध्ययन प्रस्तुत करनेवाली महत्त्वपूर्ण पुस्तक है-धरती और बीज।

ग्यारह अध्यायों में विभाजित धरती और बीज पुस्तक में डॉक्टर राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी ने धरती और बीज संबंधी भौतिक, मनोवैज्ञानिक, सौंदर्यबोध, अभिव्यक्ति, चिंतन और विश्वास-प्रणाली के अनेक विशिष्ट पक्षों का अन्वेषण किया है।

महत्त्वपूर्ण शोधग्रंथ के प्रथम अध्याय में जहाँ अध्ययन की दृष्टि को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है, वहाँ दूसरे अध्याय में लोकवार्ता की धरती-संबंधी उन विभिन्न अवधारणाओं की चर्चा है जो तत्संबंधी पुराकथा और उनके अभिप्रायों, अनुष्ठानों, विश्वास-प्रणाली, अभिव्यक्ति प्रणाली, भोजन और आच्छादन प्रणाली के रुप में अभिव्यक्त होते हैं।   तीसरा अध्याय 'बीज' पर है, तो चौथे अध्याय में धरती-बीज के साथ अनंत प्रकृति के संबंधों का एक रेखांकन है।  पाँचवें अध्याय में धरती-बीज के साथ मानव के भौतिक संबंध को रोखांकित किया गया है, तो छठे तथा सातवें अध्याय में लोकमानस के सौंदर्यबोध में वानस्पतिक सौंदर्य की छवि की संक्षिप्त चर्चा के साथ बीज-वृक्ष संबंधी कथा-अभिप्रायों का उल्लेख है।   आठवाँ अध्याय लोक अनुष्ठानों में 'वृक्ष-वनस्पति' संबंधी मान्यताओं को समर्पित है।   नवें अध्याय में 'चिंतन-प्रणाली में धरती-बीज के बिंबों' का अध्ययन है, तो दसवाँ अध्याय भाषा-संपदा में धरती और बीज के बिंबों पर प्रकाश डालता है।

धरती और बीज- लोक-परंपरा की श्रृंखला में प्रकाशित हिंदी में पहली पुस्तक।

 

डाक्टर राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी सनातन धर्म कालेज, पानीपत, में व्याख्याता हैं।   आपने आगरा विश्वविद्यालय से लोकवार्ता विज्ञान में डी.लिट्, की उपाधि प्राप्त की और इसी क्षेत्र में गत कई वर्षों से शोध-कार्य में संलग्न हैं। १९८६ में उत्तरप्रदेश संस्थान ने चतुर्वेदीजी को श्रीधर पाठक नामित पुरस्कार से सम्मानित किया।  आपके महत्त्वपूर्ण प्रकाशित ग्रंथों में है: भारतीय संगीत परंपरा और स्वामी हरिदास, लोक शास्र, लोकोक्ति और लोकविज्ञान, ब्रज लोक-गीत।   आपने कई अन्य जन प्रसारण माध्यमों से भी लोकवार्ता विज्ञान का प्रसार किया है।

धरती और बीज अपनी कोटि की हिंदी में पहली पुस्तक है।

लेख - धरती और बीज एक विश्वविद्या  

ब्रज-वैभव  Vraja - The region of Vrindavan and Mathura known as Vraja bhumi.


© इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र पहला संस्करण: १९९७

राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, २-३८, अंसारी मार्ग, दरियागंज, नयी दिल्ली -  ११०००२

मुद्रक बालाजी आॅफसेट, नवीन शाहदरा, दिल्ली-११००३२

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