मलिक मुहम्मद जायसी

जायसी की काव्य रचना

साहित्यिक विद्वानों तथा अनेकों शोधकर्ताओं के साक्ष्या की बुनियाद पर जायसी की निम्नलिखित काव्य रचनाएँ हैं--

१. पद्मावत
२. अखरावट
३. सखरावत
४. चंपावत
५. इतरावत
६. मटकावत
७. चित्रावत
८. सुर्वानामा
९. मोराईनामा
१०. मुकहरानामा
११. मुखरानामा
१२. पोस्तीनामा
१३. होलीनामा
१४. आखिरी कलाम
१५. धनावत
१६. सोरठ
१७. जपजी
१८. मैनावत
१९. मेखरावटनामा
२०. कहारनामा
२१. स्फुट कवितायें
२२. लहतावत
२३. सकरानामा
२४. मसला या मसलानामा

कहरानामा में आले मुहम्मद की सूची दी गई है। कहा जाता है कि पास्तीनामा अपने गुरु के अमल पर व्यंग करते हुए लिखा था। जब जायसी ने यह कृति पूरी की, तो इसे अपने गुरु के सामने प्रस्तुत किया, इनके गुरु बहुत नाराज हुए। उन्होंने नाराज होकर जायसी को शाप दे डाला कि तुम्हारे सातों बच्चे छत गिरने से मर जायेंगे। इसी शाप के कारण इनके सातों बच्चे प्राणांत कर गए। इसके साथ ही गुरु ने यह भी कहा था कि जायसी तुम्हारा नाम तुम्हारे चौदह ग्रंथों के द्वारा जिंदा रहेगा। अंत में यह सब वैसा ही हुआ।

मुसलमानी धर्म के विविध अंगों पर काव्य लिखने की परंपरा जायसी ने ही आरंभ की थी, जो बाद तक चली आ रही है। "आखरी कलाम' में जायसी ने कयामत के दिन का चित्रण काफी सुंदरता से किया है।

 

| कवि एवं लेखक |

Content Prepared by Mehmood Ul Rehman

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