हजारीप्रसाद द्विवेदी के पत्र

प्रथम खंड

संख्या - 7


IV/ A-2005

शान्तिनिकेतन

3.9.35

श्रद्धास्पदेषु,

       कृपा-पत्र मिला। मनी आर्डर भी मिल गया। धन्यवाद का पत्र भेज दिया जायेगा। दीनू बाबू का मकान खाली नहीं है। पूजा की तातील के बाद शायद खाली हो। 40 /- रुपये उसका किराया है। जिस मकान में बड़े दादा रहा करते थे, जिसे नाहर जी ने किराये पर ले रखा था, खाली है। मकान इस समय बड़ी माँ (दीनू बाबू की माता) के अधिकार में है। वे उसके दो खंड कर के प्रत्येक का 20 /- रुपये किराया उन्होंने तै किया है। अगर दोनों मिला कर पूरा मकान साथ-साथ कर के लेना चाहें तो 35 /- रुपये मासिक किराया देना होगा। एक महीने का किराया पेशगी दे देना होगा। इस मकान के सिवाय और कोई अच्छा मकान इस समय ख़ाली नहीं है। आप अगर इसे लेना चाहें तो शीध्र पत्र या तार दे दें क्योंकि बड़ो माँ इस समय आई हैं और बृहस्पतिवार तक रहेंगी। इसके बाद कॉरेसपोंडेंस से तै करने में देर होगी। मुझे ठीक-ठीक नहीं मालूम कि आश्रम का और कोई मकान ख़ाली है या नहीं। पर डाकघर के पास वाला मकान गुज्र्जरी इस समय ख़ाली पड़ा है। आप रथी बाबू से पूछ देख सकते हैं।

       एक और बात।

       मैं अपनी माताजी की आँख दिखाने के लिये कलकत्ता आना चाहता हूँ। 18 सितम्बर के आस-पास जाऊँगा। मेरे एक मित्र चित्तरंजन एवेन्यू में रहते हैं। उसके आस-पास कोई धर्मशाला आपकी जानी हो तो लिखियेगा। सब कुशल है।

आपका

हजारी प्रसाद

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© इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र १९९३, पहला संस्करण: १९९४

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प्रकाशक : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एव राजकमल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली